ताइवान में माज़ू तीर्थयात्राओं के कैलेंडर
दो तीर्थयात्राएँ
दाज्या और बाइशातुन अलग माज़ू तीर्थयात्री समुदायों के नाम हैं। दाज्या का जुलूस ताइचुंग के झनलान मंदिर से निकलता है, जिसके अंग्रेज़ी नाम की प्रचलित वर्तनी Jenn Lann Temple है। उसका गंतव्य च्यायी काउंटी के शिनगांग का फ़ंगथ्येन मंदिर है। बाइशातुन की यात्रा म्याओली काउंटी के तोंगशियाओ के गोंगथ्येन मंदिर से शुरू होती है और युनलिन काउंटी के बेइगांग के छाओथ्येन मंदिर तक जाती है। हर तीर्थयात्रा माज़ू की प्रतिमा अपने मूल मंदिर से दूसरे पूजा-केंद्र तक ले जाकर वापस लाती है।
बाइशातुन विशेष रूप से पैदल चलने की कठिनाइयों और अनिश्चितता से जुड़ा है। उसकी आने-जाने की यात्रा लगभग 400 किलोमीटर होती है, हालाँकि दूरी मार्ग के साथ बदलती है। भक्त माज़ू की पालकी—उनकी प्रतिमा वाली उठाकर ले जाई जाने वाली आसंदी—की हलचल को देवी के निर्देश समझते हैं। जुलूस मार्ग बदल सकता है, अप्रत्याशित ठहराव चुन सकता है या पिछले वर्ष से अलग गति से चल सकता है।
दाज्या अधिक निश्चित यात्रा-क्रम अपनाता है, जिसमें रास्ते के रात्रि-ठहराव और समारोह तय होते हैं। बाइशातुन अपने मुख्य पड़ावों के समय पहले निर्धारित करता है, लेकिन बीच की अधिकांश यात्रा खुली रखता है। इस अंतर का प्रभाव पैदल चलने के अनुभव और तीर्थयात्रियों के स्वागत की तैयारी कर रहे समुदायों के काम, दोनों पर पड़ता है।
वार्षिक समय-सारिणियाँ
मंदिर हर वर्ष प्रस्थान और वापसी की तारीखें घोषित करते हैं। देवता की स्वीकृति जानने के लिए डाले जाने वाले लकड़ी के जोड़ीदार शकुन-खंडों की कार्यक्रम चुनने में भूमिका होती है। इसके बाद तीर्थयात्रा का कैलेंडर प्रस्थान, गंतव्य पर आगमन, मुख्य समारोह और घर-वापसी को अलग-अलग बताता है।
2026 के कार्यक्रम दिखाते हैं कि यात्राओं के चरण कैसे जुड़े हैं। नीचे सभी तारीखें ताइवान की ग्रेगोरियन तारीखें हैं।
| निर्धारित पड़ाव | बाइशातुन गोंगथ्येन मंदिर | दाज्या Jenn Lann Temple |
|---|---|---|
| प्रस्थान | 12 अप्रैल 2026 की देर शाम | 17 अप्रैल 2026 की शाम |
| गंतव्य पर आगमन या ठहराव | 16 अप्रैल को बेइगांग आगमन | 20 अप्रैल को शिनगांग में ठहराव |
| गंतव्य का प्रमुख समारोह | 17 अप्रैल को मध्यरात्रि के कुछ बाद धूप की अग्नि ग्रहण करना | 21 अप्रैल को जन्मदिवस समारोह |
| मूल मंदिर में वापसी | 20 अप्रैल | 26 अप्रैल |
बाइशातुन में जुलूस के लौटने के बाद धूप-पात्र 1 मई को खोला जाना निर्धारित था। इसलिए घर-वापसी और धूप के अनुष्ठानों की पूर्णता कैलेंडर में अलग स्थान रखते हैं।
माज़ू का व्यापक रूप से मनाया जाने वाला जन्मदिवस तीसरे चंद्र महीने का तेईसवाँ दिन है, जो 2026 में 9 मई को पड़ता है। 21 अप्रैल को शिनगांग का जन्मदिवस समारोह दाज्या के तीर्थयात्रा-कार्यक्रम का हिस्सा है। वार्षिक जन्मदिवस इस समय को धार्मिक संदर्भ देता है, जबकि हर मंदिर की तीर्थयात्रा का अपना क्रम और तारीखें हैं।
यात्रा
बाइशातुन में प्रस्थान-जुलूस से पहले तैयारियाँ शुरू होती हैं। अगुआ पताका उठाई जाती है और माज़ू की प्रतिमा उनकी पालकी में स्थापित की जाती है। ये कार्य मूल मंदिर छोड़ने से पहले यात्रा-दल की अनुष्ठानिक पहचान स्थापित करते हैं। प्रतिमा उठाना, पताका के पीछे चलना और जुलूस का स्वागत करना एक ही यात्रा में भाग लेने के अलग तरीके हैं।
बाइशातुन में जिनश्यांग (进香), यानी धूप की तीर्थयात्रा, मंदिरों के संबंध को मूर्त रूप देती है। छाओथ्येन मंदिर में धूप की अग्नि ग्रहण की जाती है, पात्र में बंद की जाती है और घर लाई जाती है। बाद में गोंगथ्येन मंदिर में पात्र खोलना अनुष्ठान का एक और चरण पूरा करता है। बाहर की पैदल यात्रा, गंतव्य पर पूजा और धूप की अग्नि के साथ वापसी एक जुड़ी हुई धार्मिक यात्रा बनाते हैं।
तीर्थयात्राएँ अपने मार्ग के समुदायों पर भी निर्भर होती हैं। मंदिर और परिवार जुलूस का स्वागत करते हैं, जबकि स्वयंसेवक भोजन, पीने का पानी, विश्राम-स्थल और अन्य सहारा देते हैं। कुछ लोग कई दिन चलते हैं, अन्य छोटे हिस्से में शामिल होते हैं और अनेक लोग रास्ते के यात्रियों की देखभाल करके भाग लेते हैं। यह काम मंदिर के निर्धारित समारोहों को यात्रा कर रहे बड़े समुदाय की दैनिक आवश्यकताओं से जोड़ता है।